चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने शिव शक्ति बिंदु के पास चंद्र मिट्टी की रासायनिक पहचान की। उसके Alpha Particle X-ray Spectrometer, यानी APXS, ने सोडियम, पोटैशियम और सल्फर की मात्रा मापी। अप्रैल 2025 के अध्ययन में उन मापों को Apollo 16 और Luna 20 के चंद्र उच्चभूमि नमूनों से मिलाया गया। तुलना में सोडियम-पोटैशियम कम और सल्फर अधिक निकला। यही अंतर चंद्रमा की गहरी, पुरानी सामग्री तक सवाल ले जाता है।

कितना अंतर मिला

APXS ने सोडियम 700–2800, पोटैशियम 300–400 और सल्फर 900–1400 ppm मापा। ppm का अर्थ दस लाख भागों में किसी तत्व के भाग हैं। पुराने उच्चभूमि नमूनों की तुलना में सल्फर लगभग 300–500 ppm अधिक था। मात्रा का यह अंतर छोटा दिख सकता है, लेकिन मिट्टी किन स्रोतों से बनी है, इसे जाँचने में उपयोगी है।

सल्फर ऊपर कैसे आया होगा

टीम ने कई संभावनाएँ परखीं। कुछ प्रकार के उल्कापिंड सल्फर जोड़ सकते हैं, लेकिन गणना में उनका योगदान पूरे अतिरिक्त सल्फर को नहीं समझा पाया। स्थानीय दिन के तापमान भी सल्फर के लंबे समय तक ठंड में फँसे रहने वाली व्याख्या के अनुकूल नहीं थे।

शोधकर्ताओं ने दूसरी संभावना रखी: लगभग 4.3 अरब वर्ष पहले South Pole–Aitken बेसिन बनाने वाले विशाल प्रहार ने गहरी चंद्र सामग्री बाहर निकाली हो। उसमें लौह-सल्फाइड वाला खनिज ट्रॉइलाइट रहा हो और बाद के प्रहारों ने उस सामग्री को लैंडिंग क्षेत्र की मिट्टी तक पहुँचाया हो।

माप से भूवैज्ञानिक व्याख्या तक

तत्वों की मात्रा रोवर का सीधा माप है। गहरे आदिम मैंटल का योगदान उन मापों, तुलना और मॉडल से निकली व्याख्या है। मैंटल चंद्रमा की बाहरी पर्पटी के नीचे का हिस्सा है। APXS ने उसे खोदकर चट्टान का नमूना नहीं लिया।

इस संभावित संबंध को अधिक कठोरता से जाँचने के लिए भविष्य में उस क्षेत्र का नमूना पृथ्वी पर लाना उपयोगी होगा। प्रयोगशाला में खनिजों, समस्थानिकों और उम्र की जाँच चंद्रमा की शुरुआती परतें बनने की कहानी पर नई जानकारी दे सकती है। फिलहाल स्थल पर किए गए प्रज्ञान के माप ने आगे की जाँच के लिए एक स्पष्ट रासायनिक प्रश्न दिया है।

मुख्य बातें

  • APXS ने शिव शक्ति बिंदु की मिट्टी में सोडियम 700–2800, पोटैशियम 300–400 और सल्फर 900–1400 ppm मापा।
  • तुलना में सल्फर Apollo 16 और Luna 20 मिट्टी से 300–500 ppm अधिक था; उल्कापिंड और cold trapping अकेले पर्याप्त व्याख्या नहीं बने।
  • आदिम मैंटल सामग्री निष्कर्षित स्रोत है, सीधे उठाकर लाया गया नमूना नहीं; इसकी पुष्टि के लिए भविष्य का sample return अहम होगा।

स्रोत और संदर्भ

  1. Communications Earth & Environment · Primitive lunar mantle materials at the Chandrayaan-3 landing site ↗25 अप्रैल 2025
  2. ISRO · Primitive mantle material revealed by Chandrayaan-3 APXS volatile measurements in the South Polar Region of the Moon ↗30 अप्रैल 2025
  3. ISRO · Chandrayaan-3 Details — payload objectives ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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