नई दिल्ली के मध्यप्रदेश भवन में 10 अगस्त को साड़ी और हथकरघा की परंपरा को मंच मिला। 13 प्रतिभागियों ने बंगाली, महाराष्ट्रीयन सहित शैलियाँ दिखाई। सिल्क, बनारसी, बाघ प्रिंट सिल्क, पूना सिल्क, पटोला—सूची में कई राज्य हैं। हस्तनिर्मित और हैंडलूम साड़ियों को विशेष आकर्षण बताया गया। नियम: 20 मिनट में ड्रेपिंग, फिर रैंप और शैली की व्याख्या।
निर्णायक महेश गुलाटी—सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक, हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट, अब नेशनल काउंसिल फॉर हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट में सलाहकार—और डॉ. रुचिरा अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, फैब्रिक एंड अपैरल साइंस, लेडी इरविन कॉलेज। परिणाम: प्रथम गुनगुन, द्वितीय ममता कपसे, तृतीय नंदिनी त्रिपाठी, चतुर्थ रूपाल कपसे, पंचम डॉ. मेघा।
यह बुनकर की पारी क्यों नहीं?
आयोजन हैंडलूम दिवस के उपलक्ष्य में है। मंच पर साड़ी पहनने की शैली और सांस्कृतिक व्याख्या जाँची गई। महेश्वर या चंदेरी के करघे पर बैठा बुनकर इस विज्ञप्ति का नायक नहीं। तंतु इसे दिल्ली के भवन का सांस्कृतिक कार्यक्रम लिखता है, जिले की बुनाई नहीं।
तस्वीर सम्मान की
स्क्रीन पर Saree Draping & Handloom Demonstration Competition। चार लोग, एक प्रमाण-पत्र थामे। करघा इस फ्रेम में नहीं।
मुख्य बातें
- बाघ प्रिंट सिल्क सहित कई शैलियाँ गिनी गईं; मध्यप्रदेश की साड़ी एक विकल्प थी, पूरा मंच नहीं।
- हैंडलूम दिवस के उपलक्ष्य में आयोजन; बुनकर का नाम निर्णायक पंक्ति में नहीं।
- प्रमाण-पत्र और स्लाइड स्क्रीन दिखती है, लूम का डेमो फ्रेम में नहीं।
स्रोत और संदर्भ
- मध्य प्रदेश जनसंपर्क · मध्यप्रदेश भवन में साड़ी ड्रेपिंग एवं हैंडलूम प्रदर्शन प्रतियोगिता ↗10 अगस्त 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



