चौथी लालटेन सुर की है, मंत्रालय की फाइल नहीं। 21 जून। विश्व संगीत दिवस। 14 अंचल। जगह भोपाल: जनजातीय संग्रहालय। नाम: संगीत संध्या।

नृत्य: स्मिता महाजन, पुणे। साथ: तीन शिष्याएँ। रचनाएँ संस्कृत और हिंदी; लेखन-संगीत-संयोजन स्वयं का। शुरुआत विनायक स्तुति; मल्लारी चार गति; देवी कौतुकम् तीन राग; दो पदम; तिल्लाना राग देश।

जो 75 और जो यमन हैं

ग्रंथ: मार्गम उन्मेष, तीन खंड, 75 भरतनाट्यम रचनाएँ—कलाकार की पंक्ति, बिक्री आँकड़ा नहीं। गायन: प्रदक्षिणा भट्ट। यमन कल्याण; एकताल बड़ा ख़याल, तीनताल छोटा ख़याल। फिर ग्वालियर घराने के तराना-तिरबट; हमीर, केदार, बहार, दरबारी, अड़ाना, भोपाली—रंगत। भजन: मोहन की राधा, पंडित सज्जनलाल ब्रह्मभट्ट।

संगत: चैतन्य भट्ट, तल्लीन त्रिवेदी। स्वागत: नामदेव, शुक्ला। बड़ी संख्या में श्रोता—गिनती शीट नहीं देती। चित्र संध्या का फ्रेम है। रौनक 14 अंचल इस कोण में नहीं बिठाती।

मुख्य बातें

  • 14 अंचल विभाग की श्रृंखला है; यह रिपोर्ट संग्रहालय की संध्या खोलती है।
  • 75 रचनाएँ ‘मार्गम उन्मेष’ की पंक्ति हैं, उस शाम की सूची नहीं।
  • नाम और राग शीट गिनती है; दर्शक संख्या नहीं देती।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश जनसंपर्क · विश्व संगीत दिवस पर कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य से सराबोर रही सांझ ↗21 जून 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 18 सितंबर 2026।

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